इ नाम में किसान बागवान

इ नाम में किसान बागवान

राष्ट्रीय कृषि बाजार, सोलन में 7 जनवरी को सजेगा । किसान बागवान प्रदेश के इस पहले बाजार में भाग ले सकते है । इंटरनेट पर आधारित किसान उत्पादों के विपणन का यह एक राष्ट्रव्यापी मंच है । सेब बागवान भी इसके बारे में जानकारी लेकर अपने उत्पादों के लिए सही बाजार तलाश सकते है । […]

अभी तक जो है, वैसा होगा बागवानों का भविष्य

अभी तक जो है, वैसा होगा बागवानों का भविष्य

मंडियों में कीचड़, गंदगी, अव्यवस्था, ट्रैफिक जाम, चालू आढ़ती/ लदानी, प्रति पेटी आढ़ती की चूंगी, कोई बाजार स्थाईत्व नहीं, बागवानों का शोषण और भी न जाने कितनी अनन्त समस्याओं से बागवान गुजरता है, ये उसे ही खबर है । बाकी सब गप्पें है …. Only the wearers knows where the shoes pinches … #miorcharddiary #himachalapple […]

सेब के पौधे, इटली अमेरिकी !

सेब के पौधे, इटली अमेरिकी !

बाज़ार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा में कितना जागरूक हो कर काम करने की जरूरत है इसका अंदाजा इंटरनेट की बढ़ती स्पीड से लगाया जा सकता है । अभी भी होर्टीकल्चर विभाग किसी भी योजना को जमीनी स्तर पर लाने के लिए कितना उपलब्द है ! मानसिकता सरकारी प्रोजेक्ट में फोटो तक की ही बढ़ती जा रही […]

किसान-बागवान खुशहाल

किसान-बागवान खुशहाल

बागवांनी को अगर आधुनिक तकनीक को सीखकर किया जाए तो यह मुनाफे का सौदा है । बहुत से किसान बागवान देश भर से इस वाक्य पर खरे उतर रहे है । किसान बागवान वहाँ धोखा खा जाते है जब वो मौजूदा व्यवस्था और तकनीक से जागरूक न हो । #miorcharddiary #gharwalapple #appleorchard #progressivegrower

सेब के लिए संजीवनी बर्फ, समस्या बन रही बगीचे में पत्तियां जलाना ।

सेब के लिए संजीवनी बर्फ, समस्या बन रही बगीचे में पत्तियां जलाना ।

जहां बर्फ सेब बागवांनी के लिए वरदान साबित होती है वहीं सेब बागवानों द्वारा बगीचे में सेब की पत्तियों को जलाना खतरनाक साबित हो रहा है । और ये ऐसे समय मे हो रहा है जब लगभग हर बागवान सोशल मीडिया से भी जुड़ा है, पढ़ा लिखा है और सेब की फसल से अच्छी खासी […]

सरकारी सिस्टम में लूप होल का खामियाजा

सरकारी सिस्टम में लूप होल का खामियाजा

नियम तो बने है, पर धरातल पर नही उतरते, या तो अधिकारियों तक ही सीमित है या फिर कुछ अधिकारियों के ही हिसाब से चलते है । खामियाजा आम किसान …. कब तक

प्राकृतिक खेती , क्या देश मे बढ़ती खाद्यान की जरूरत को पूरा कर सकती है ?

प्राकृतिक खेती , क्या देश मे बढ़ती खाद्यान की जरूरत को पूरा कर सकती है ?

आप भी इस विषय पर कमेंट के माध्यम से अपनी राय रखें । आज जहां देश मे खेती योग्य भूमि की कमी है और उसी कम भूमि में बढ़ती जनसंख्या की भोजन की जरूरत को पूरा करना है । प्राकृतिक खेती इस बारे में किटनी कारगर है ।