मेरी ही बिल्ली , मुझे ही म्याऊं …

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बढ़ते बाज़ारवाद और आधुनिक तकनीक के परिवेश में किसान बागवानों को पहले से ज्यादा जागरूक, संगठित होना पड़ेगा । इसी में बागवानों की भलाई है अन्यथा निजी कंपनियां वो किसी भी क्षेत्र में हो अपने मुनाफे के लिए बागवानों के संसाधनों का बैगर रोकटोक के दोहन करती रहेगी ।

याद रहे ! संगठित सेब की पैदावार से ही हिमाचल में सेब उद्योग विकसित हुआ है । और इसे किसान बागवान ही संगठित होकर आगे बढ़ा सकते है ।

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