बिना किसी सुचारू व्यव्स्था के, बागवान कब तक ठगे जाएंगे

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पुलिस तो अपना काम कर ही रही है पर इसके साथ साथ सेब बागवानों के साथ ऐसा न हो इसके लिए किस तरह की व्यवस्था की जा रही है । एक स्तर पर बागवान भी ज्यादा कीमत के चक्कर में आकर बिना पंजीकृत आढ़ती को अपना माल बेच देते है ।

इस समस्या के बारे में सबसे पहले खुद बागवानों को भी जागरूकता की जरूरत है । तभी इस दिशा में सकारात्मक परिणाम आ सकते है । सारी चाजों के लिए सरकार पर निर्भर होना भी कई नई समस्याओं को जन्म देता है ।

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