बागवानी में स्टार्टअप की जरूरत कितनी ?

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हिमाचल एक बागवानी प्रदेश के रूप में विकसित हो रहा है । प्रदेश पूरे देश मे सेब उत्पादन पर जम्मू कश्मीर के बाद दूसरे स्थान पर है । बागवानी को एक समृद्ध उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक रूप से आधारभूत ढांचे के विकास की जरूरत है ।

सेब / फल उत्पादन में हिमाचल के पहाड़ी जिले शिमला, किन्नौर, मंडी , कुल्लू और चम्बा में आज भी फल ढुलान के लिए पारम्पारिक तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है । फल उत्पादन करने वाले हर गांव या पंचायत में या तो सड़क नही है या है तो खस्तेहाल में है । हिमाचल बिजली पैदा तो जरूर करता है, और उसे बेचता भी है, पर यहां पर पहाड़ी इलाकों में बिजली व्यवस्था देखने लायक है । बिजली की सुचारू व्यवस्था न होने से गांव में कोई भी बिजली आधारित मशीनी काम नही हो सकता ।

पर्यावरण दिन प्रतिदिन कई कारणों से गिर रहा है जिसमे, धुंआ, पेड़ो का काम होना, व्यवसाईक गतिविधियों का बढ़ना आदि है ।

पूरा बागवानी उद्योग पानी के लिए बारिश पर निर्भर है । उत्पाद पैदावार के बाद उसके विपणन की व्यवस्था के बुरे हाल है । आधे से ज्यादा पैदावार बर्बाद इसलिए हो रही है कि फल प्रसंस्करण की कोई जानकारी नही है और न ही कोई व्यापक सरकारी व्यवस्था ।

बागवांनी में और भी बहुत सारे ऐसे आयाम है जो एक स्टार्टअप को चाह रहे है । जिससे ये एक समृद्ध उद्योग बने ।

आप के पास भी कोई सुझाव हो तो वो उद्यमी आप भी हो सकते है जो लाखों बागवानों की समस्याओं को किसी भी स्तर पर सुलझाएं ।

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