चार हजार करोड़ से ज्यादा , सेब से आर्थिकी

0
457
सोशल मीडिया पर डायरी शेयर करें

हिमाचल में सेब से चार हजार करोड़ से ज्यादा की आर्थिकी है । इस बार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह प्रदेश का अकेला फायदेमंद उद्योग है ।

जो किसान बागवान अपने खून पसीने के रंग से सेब को लाल रंग तक पहुचाकर देशभर के बाजारों को भरता है उसके लिए इस कदर व्यवसाईक ढांचा उपलब्द है ही नही ।

  1. सेब बागवांनी से प्रदेश में कितने बागवान सीधे तौर पर जुड़े है सरकार के पास कोई डाटा ही नहीं है ।
  2. राष्ट्रीय स्तर पर सेब उत्पादन का कोई व्यावहारिक रिकार्ड नहीं है ।
  3. सरकार और अधिकारियों की नजरों के सामने रसायनों, पौध व अन्य तरह के सामान का गैरकानूनी व्यवसाय हो रहा है ।
  4. उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए विपणन की कोई आधुनिक सुविधा नहीं ।
  5. संबंधित विभागों की वेबसाइट पर या तो पुराना डाटा या फिर वेबसाइटें बागवानों के आसान प्रयोग वाली नहीं ।
  6. विश्वबैंक और अन्य अंतराष्ट्रीय संस्थाओं से पोषित होने के बाद और इण्टरनेट की पहुच के बावजूद भी अंतिम बागवान असहाय ।
  7. योजनाओं को शुरू करने के लिए अनुदान तो बहुत पर उन्हें गति देने और बाजार देने के लिए कोई व्यापक योजनाएं नही ।
  8. मालढुलाई के लिए बहुत पुरानी पेटी आधारित योजनाएं जो किसानों को चूस रही है । मंडियां असुविधा से भरी पड़ी है ।
  9. फल प्रसंस्करण और संवर्धन की कोई माकूल व्यव्यस्था नहीं ।

और भी अन्य बहुत सारी ऐसी समस्याएं है जो इस उद्योग के लिए सेहतमंद नहीं है । सरकार तो कई स्तरों पर चुंगी वसूल कर अपना काम सही तरीके से कर रही है पर इस उद्योग का आधारभूत ढांचा विकसित हो कोई व्यापक योजना नही है ।

आप भी किसान बागवान को जागरूक करने का काम कर सकते है , बस नीचे दिए गए लिंक से इस लेख को अपने बागवान दोस्तों के साथ फेसबुक, वॉट्सऐप पर शेयर करें । अगर आपका कोई सुझाव हो तो हमसे जरूर साझा करें ।

Like Us

सोशल मीडिया पर डायरी शेयर करें